वन नेशन वन इलेक्शन पर सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने केंद्र सरकार पर उठाये सवाल

आज़ाद समाज पार्टी के प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने केंद्र सरकार पर ‘वन नेशन वन इलेक्शन’ को लेकर सवाल उठाये हैं। उन्होंने कहा कि ये स्वभाविक राजनीति को बाधित कर सकता है। जनता के मन में इसे लेकर कई तरह के सवाल है। इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि इसके बाद केंद्र सरकार फ़्री राशन योजना भी बंद कर देगी।

सांसद चंद्रशेखर आज़ाद ने वन नेशन वन इलेक्शन पर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लम्बा चौड़ा पोस्ट लिखा। उन्होंने अपनी पोस्ट में यह भी दावा किया कि सरकार लोकसभा चुनाव, विधानसभा चुनाव और निकाय चुनाव की वजह से गरीब जनता से वोट लेने के लिए जो रियायत देती है। वह भी बंद हो जायेगा और साथ ही मुफ्त में मिलने वाला 5 किलो राशन भी बंद हो जायेगा।

केंद्र सरकार से पूछे सवाल

चंद्रशेखर आज़ाद ने वन नेशन वन इलेक्शन पर केंद्र सरकार से सवाल करते हुए सोशल मीडिया पर लिखा-”वन नेशन, वन इलेक्शन” स्वाभाविक प्रवाहवान राजनीति को बाधित करना है। मेरे कुछ सवाल है एनडीए सरकार से। “वन नेशन, वन इलेक्शन” की प्रक्रिया एक बार शुरू होने के बाद कभी ये प्रक्रिया भंग नही होगी ये “जनता के मन की बात” है क्योंकि आजाद भारत के प्रथम चुनाव, साल 1952 में लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही हुए थे।

उन्होंने कहा कि अभी हाल ही में, चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र का चुनाव हरियाणा के चुनाव के साथ कराने में असमर्थता व्यक्त की थी तो जो चुनाव आयोग 2 राज्यों का चुनाव एक साथ नही करवा पाया, वो 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ चुनाव कैसे करवा पाएगा? ये संदेहास्पद न होकर हास्यास्पद लगता है।

उन्होंने आगे लिखा कि यदि चुनाव आयोग “वन नेशन, वन इलेक्शन” की क्षमता रखता है तो एनडीए सरकार उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर की विधानसभाओं को भंग कर महाराष्ट्र विधान सभा चुनाव के साथ इन चारों राज्यों की विधानसभाओं के करवाकर, चुनाव आयोग की क्षमता का पता लगा सकता है।

सांसद ने लिखा कि जिस तरह से जम्मू-कश्मीर में दस साल तक विधानसभा चुनाव को रोके रखा वो तो अपने आप में सवाल है और अब जो चुनाव हो रहे है वो भी माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेश के बाद और बात हो रही है “वन नेशन, वन इलेक्शन” की।

आजाद समाज पार्टी के नेता ने कहा कि पूर्व में मोदी सरकार लोक सभा, विधान सभा और निकाय चुनाव के समय भुखमरी सूचकांक में आखिरी पायदानों पर पडी जनता से वोट लेने के मकसद से जनता को रियायत देती रही है। “वन नेशन, वन इलेक्शन” के सिस्टम से वो मुफ्त में मिलने वाले 5 किलो अनाज को भी छीनने का प्रयास कर रही है। स्मार्ट सिटी, महिला आरक्षण विधेयक का हाल तो सब को पता है सवाल ये है कि वर्ष 2014 में जो “गाँव” गोद लिए थे क्या वो अभी भी गोद में ही है?

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