सुखबीर सिंह बादल ने भारत-पाक संघर्षविराम को बताया समझदारी भरा कदम, पीएम मोदी की सराहना की

सीजफायर पर बोले अकाली दल प्रमुख – “शांति सबसे बड़ा समाधान, आलोचना करने वाले असली दुश्मन”

भारतीय सेना द्वारा हाल ही में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्षविराम समझौते को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हैं। इस बीच शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने इस फैसले को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ की है। उन्होंने पीएम मोदी की दूरदर्शिता, कूटनीतिक कुशलता और निर्णायक नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह फैसला युद्ध के बाद शांति स्थापित करने की दिशा में एक बड़ा और बुद्धिमत्तापूर्ण कदम है।

प्रधानमंत्री के फैसले को बताया राजनयिक कौशल का उदाहरण

सुखबीर बादल ने कहा कि भारतीय सेना ने जिस बहादुरी और साहस के साथ दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया, वह गर्व का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने न सिर्फ सैन्य मोर्चे पर सफलता हासिल की, बल्कि इसके बाद शांति की पहल कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की परिपक्व छवि भी प्रस्तुत की।

उन्होंने कहा,
“पीएम मोदी के नेतृत्व और भारतीय सेना की वीरता के कारण ही पाकिस्तान को संघर्षविराम के लिए अमेरिका की शरण लेनी पड़ी। युद्ध के मैदान में भारत की स्पष्ट जीत के बाद, पीएम मोदी ने पाकिस्तान के अनुरोध को स्वीकार करते हुए एक जिम्मेदार राजनेता की भूमिका निभाई है।”

युद्ध की आलोचना करने वालों पर कड़ा प्रहार

सुखबीर बादल ने उन नेताओं की आलोचना की जो संघर्षविराम समझौते को लेकर सरकार की निंदा कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे नेताओं को देश का “असली दुश्मन” करार दिया। उनका कहना है कि ये लोग युद्ध के भयावह परिणामों से अनभिज्ञ हैं और केवल टीवी पर युद्ध देखने की आदत के कारण जमीनी सच्चाई को नहीं समझते।

उन्होंने कहा,
“ऐसे नेता जिन्होंने कभी युद्ध का असली चेहरा नहीं देखा, केवल टीवी स्क्रीन पर बैठकर बयानबाज़ी करते हैं। इन्हें यह समझना चाहिए कि युद्ध में सबसे ज्यादा नुकसान सीमा से सटे राज्यों को होता है, विशेष रूप से पंजाब जैसे प्रदेश को।”

पंजाब की सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

बादल ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि युद्ध लंबा खिंचता, तो सबसे ज्यादा नुकसान पंजाब को झेलना पड़ता। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब की जनता और उनकी संपत्तियों पर सीधा खतरा होता। इसीलिए, समय रहते लिए गए संघर्षविराम के फैसले से बड़े नुकसान को टालना संभव हो सका।

उनके मुताबिक,
“पंजाब सीमावर्ती राज्य है और युद्ध की स्थिति में यह इलाका सबसे पहले प्रभावित होता है। जीवन और संपत्ति का बड़ा नुकसान झेलना पड़ता है। ऐसे में युद्ध के बाद शांति का निर्णय लेना एक संतुलित और जिम्मेदार कदम है।”

सिखों को गुमराह करने की पाकिस्तान की कोशिश नाकाम

सुखबीर बादल ने यह भी बताया कि पाकिस्तान ने युद्ध के बीच यह झूठ फैलाने की कोशिश की थी कि भारत ननकाना साहिब जैसे पवित्र स्थानों को निशाना बना रहा है। लेकिन सिख समुदाय ने पाकिस्तान के इस दुष्प्रचार को सिरे से खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा,
“पाकिस्तान ने सिखों के मन में नफरत भरने की कोशिश की थी, लेकिन हमारे समुदाय ने एकजुटता दिखाते हुए उसकी झूठी साजिश को नाकाम कर दिया। भारत की नीति साफ है – आतंकवाद और आतंकियों से कोई समझौता नहीं।”

सुखबीर सिंह बादल की यह प्रतिक्रिया बताती है कि राजनीतिक विचारधारा से अलग हटकर, जब बात राष्ट्रहित और शांति की हो, तो सभी नेताओं को एक स्वर में समर्थन देना चाहिए। उन्होंने युद्ध के बाद शांति स्थापित करने को सबसे समझदारी भरा कदम बताया और यह स्पष्ट किया कि आलोचना करने वाले लोग केवल अपने निजी या राजनीतिक फायदे के लिए देश की सुरक्षा से खिलवाड़ कर रहे हैं। शांति और रणनीति का यह संतुलन भारत को एक मजबूत, जागरूक और जिम्मेदार राष्ट्र के रूप में स्थापित करता है।

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