वाराणसी में फिल्म प्रमोशन के दौरान बोले निरहुआ – “मराठी नहीं, भोजपुरी बोलता हूं… दम है तो निकाल कर दिखाओ”
भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार और आजमगढ़ के पूर्व सांसद दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ इन दिनों अपनी नई फिल्म के प्रमोशन को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में वह वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने एक मीडिया चैनल से बातचीत के दौरान महाराष्ट्र में जारी भाषा विवाद, उत्तर प्रदेश की राजनीति, इटावा की घटना और विपक्षी नेताओं के बयानों को लेकर खुलकर अपनी राय रखी।
अपने बेबाक अंदाज़ के लिए मशहूर निरहुआ ने स्पष्ट कहा कि उन्हें अपनी भाषा भोजपुरी पर गर्व है और वे किसी भी स्थिति में इसे छोड़ने वाले नहीं हैं। इसके साथ ही उन्होंने इशारों में महाराष्ट्र में भाषा को लेकर हो रही राजनीति की आलोचना की और चुनौती भरे लहजे में कहा – “मैं मराठी नहीं, भोजपुरी बोलता हूं… दम है तो मुझे निकाल कर दिखाओ।”
भाषा विवाद पर निरहुआ की दो टूक – “गरीब पर अत्याचार क्यों?”
महाराष्ट्र में हिंदी और स्थानीय भाषाओं को लेकर छिड़ी बहस के बीच निरहुआ ने साफ शब्दों में कहा कि कुछ लोग भाषा के मुद्दे पर गंदी राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “कुछ नेताओं को गरीबों से चिढ़ है। जब कोई गरीब आदमी अपनी मातृभाषा बोलता है तो उसे निशाना बनाया जाता है, जो पूरी तरह गलत है। मैं खुला चैलेंज देता हूं, मैं मराठी नहीं बोलता, मैं भोजपुरी बोलता हूं, अगर दम है तो मुझे निकाल कर दिखाओ।”
निरहुआ ने ‘विविधता में एकता’ की भावना को भारत की असली ताकत बताया और कहा कि देश की संस्कृति अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों से मिलकर बनी है। उन्होंने ये भी जोड़ा कि इस विविधता में जबरन किसी भाषा को थोपना सही नहीं है।
इटावा की घटना पर प्रतिक्रिया – “डर्टी पॉलिटिक्स से बचें“
इटावा में कथावाचक की पिटाई के मामले को लेकर निरहुआ ने राजनीतिक दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि इस घटना को बेवजह राजनीतिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने इसे “डर्टी पॉलिटिक्स” करार दिया और कहा कि नेताओं को विकास की बात करनी चाहिए, न कि धर्म और जाति के नाम पर नफरत फैलानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि “ब्राह्मण होना केवल जाति से नहीं होता, जो ज्ञानी है वही पंडित कहलाता है। आज कुछ लोग जानबूझकर धर्म और जाति के नाम पर राजनीति कर रहे हैं, जो हमारे समाज के लिए नुकसानदायक है।”
हिंदुओं को अपमानित करने का कोई मौका नहीं छोड़ते
निरहुआ ने समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर भी जमकर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव जानबूझकर हिंदू देवी-देवताओं और मंदिरों का अपमान करते हैं ताकि एक खास वर्ग को खुश किया जा सके। उन्होंने कहा कि “उन्हें लगता है कि अगर वे हिंदू धर्म को चोट पहुंचाएंगे तो मुस्लिम खुश हो जाएंगे। लेकिन सच्चाई ये है कि अब जनता केवल विकास और राष्ट्रहित की राजनीति को प्राथमिकता देती है।”
उन्होंने यह भी कहा कि पहले आजमगढ़ में लोग सरकारी प्रमाण पत्र लेने भी नहीं जाते थे, लेकिन अब बीजेपी के शासन में वहां के हालात बदल गए हैं और लोग सरकारी दफ्तरों में खुद जाकर अपने काम करवा रहे हैं।
बिहार और उत्तर प्रदेश पर बयान – “एनडीए ने बिहार को बदल दिया“
जब निरहुआ से बिहार और उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ किया कि उनका फोकस इस समय फिल्मों पर है, लेकिन जहां पार्टी का आदेश होगा, वहां वे जरूर जाएंगे।
उन्होंने एनडीए सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि “बिहार में अब सड़कें बेहतर हो गई हैं, सुरक्षा की स्थिति सुधरी है और लोग अब जंगल राज से डरते हैं। लेकिन कुछ लोग फिर से उस पुराने दौर में ले जाना चाहते हैं। वे केवल वादे करते हैं, नौकरी मुंह से देते हैं, लेकिन असल में कुछ नहीं करते।”
दिनेश लाल यादव निरहुआ का वाराणसी दौरा केवल फिल्म प्रमोशन तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों पर भी खुलकर अपनी राय रखी। भाषा के सवाल पर जहां उन्होंने भोजपुरी को लेकर गर्व जाहिर किया, वहीं दूसरी ओर राजनीति में धर्म के इस्तेमाल की कड़ी आलोचना की। उनके बयानों से साफ है कि वे न सिर्फ एक अभिनेता हैं बल्कि एक जागरूक जनप्रतिनिधि भी हैं, जो समाज में हो रही घटनाओं पर नजर रखते हैं और जरूरी मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने से पीछे नहीं हटते।
