राहुल गांधी और खरगे ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग दोहराई
भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में घोषित सीजफायर, पहलगाम आतंकी हमला और “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच, कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने इन गंभीर घटनाओं पर चर्चा के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग उठाई है। कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी तथा पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस विषय पर तुरंत पहल करने की अपील की है।
राहुल गांधी ने विशेष सत्र की मांग को दोहराया
राहुल गांधी ने पीएम मोदी को संबोधित करते हुए अपने पत्र में लिखा है कि देश इन दिनों कई संवेदनशील और गंभीर घटनाओं से गुज़र रहा है, जिनमें पहलगाम में हुआ आतंकवादी हमला, भारतीय वायुसेना द्वारा चलाया गया ऑपरेशन सिंदूर, और पाकिस्तान के साथ किया गया सीजफायर समझौता प्रमुख हैं। उन्होंने कहा कि इन मुद्दों पर देश के लोगों और उनके निर्वाचित प्रतिनिधियों को संसद के भीतर चर्चा का अवसर दिया जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने कहा, “मैं विपक्ष की सर्वसम्मति से उठाई गई मांग को दोहराता हूं कि संसद का एक विशेष सत्र तुरंत बुलाया जाए। इन विषयों पर पारदर्शी और खुली चर्चा होना जरूरी है, जिससे देश की जनता को सच्चाई का पता चल सके और सरकार की रणनीति पर भी स्पष्टता आ सके।”
राहुल गांधी ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सबसे पहले सीजफायर की घोषणा करना यह सवाल उठाता है कि क्या भारत ने कोई कूटनीतिक पहल की या यह निर्णय बाहरी दबाव में लिया गया। उन्होंने कहा कि संसद का विशेष सत्र इन सभी पहलुओं पर चर्चा करने और एकजुट होकर भविष्य की रणनीति तय करने का एक मौका हो सकता है।
खरगे ने भी जताई चिंता, विशेष सत्र की अपील
कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने भी प्रधानमंत्री को अलग से पत्र भेजा है। उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि 28 अप्रैल 2025 को संसद में विपक्षी दलों ने मिलकर प्रधानमंत्री से अनुरोध किया था कि पहलगाम हमले को लेकर संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए। अब जब ऑपरेशन सिंदूर सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है और पाकिस्तान के साथ सीजफायर भी घोषित हो चुका है, तो यह समय है कि सरकार इन मुद्दों पर संसद में जवाब दे और विपक्ष की भूमिका को भी स्वीकार करे।
खरगे ने लिखा, “संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और वहां इन राष्ट्रीय महत्व के विषयों पर बहस होना लोकतंत्र की मजबूती को दर्शाता है। विपक्ष का काम सिर्फ आलोचना करना नहीं, बल्कि राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को समर्थन और सुझाव देना भी है। संसद का विशेष सत्र इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का एक सशक्त माध्यम हो सकता है।”
विपक्ष की एकजुटता और लोकतांत्रिक मांग
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे की चिट्ठियों से यह स्पष्ट है कि विपक्ष इन मुद्दों को लेकर एकजुट है और चाहता है कि सरकार जवाबदेही निभाए। इन दोनों नेताओं ने अपने पत्रों में यह भी उल्लेख किया कि विपक्षी दलों ने मिलकर यह प्रस्ताव रखा है और यह कोई एक पार्टी की मांग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की ज़रूरत है।
विपक्ष का यह रुख केवल सरकार की आलोचना नहीं है, बल्कि यह एक परिपक्व और जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका को भी दर्शाता है, जो चाहता है कि देश गंभीर मुद्दों पर एकजुट होकर निर्णय ले।
भारत-पाकिस्तान सीजफायर, ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पहलगाम हमले की पृष्ठभूमि में देश की आंतरिक सुरक्षा, कूटनीति और सेना की रणनीति पर खुली बहस की ज़रूरत महसूस की जा रही है। कांग्रेस ने संसद का विशेष सत्र बुलाकर इन सभी पहलुओं पर चर्चा करने की मांग की है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और देश की जनता को पूरी जानकारी मिले।
