बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण पर सियासी घमासान: तेजस्वी यादव बोले- लोकतंत्र के खिलाफ है प्रक्रिया का तरीका

बिहार में इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर सियासत तेज हो गई है। जहां एक ओर राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि 90% से अधिक काम पूरा हो चुका है और इसे 25 जुलाई तक खत्म करने का लक्ष्य है, वहीं विपक्षी दल खासकर राष्ट्रीय जनता दल और उसके नेता तेजस्वी यादव इस प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जता रहे हैं।

तेजस्वी यादव ने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि उन्हें खुद SIR से कोई समस्या नहीं है, लेकिन जिस तरह से यह किया जा रहा है, वह लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

तेजस्वी यादव का आरोप: लोकतंत्र को कमजोर करने की साजिश

प्रेस को संबोधित करते हुए तेजस्वी यादव ने कहा,

“हम लोकतंत्र में रहते हैं और बिहार को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है। लेकिन आज उसी बिहार में लोकतंत्र को धीरे-धीरे खत्म किया जा रहा है। हम इसे चुपचाप नहीं देखने वाले। हम हर मंच पर इसका विरोध करेंगे।”

उन्होंने यह भी बताया कि वे इस मुद्दे को लेकर देश के विभिन्न राजनीतिक नेताओं को पत्र लिख रहे हैं और इसे एक राष्ट्रीय मुद्दा बनाएंगे। तेजस्वी ने कहा कि 19 जुलाई को दिल्ली में इंडिया गठबंधन की बैठक में वे इस विषय को प्रमुखता से उठाएंगे, जहां कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत अन्य बड़े नेता मौजूद रहेंगे।

35 लाख नाम हटाए जाने पर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने सबसे बड़ा सवाल उस रिपोर्ट पर उठाया जिसमें कहा गया है कि 35 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने चुनाव आयोग के प्रेस नोट को दिखाते हुए कहा कि इसमें भी वही आंकड़ा दिया गया है जो पिछले दिनों मीडिया रिपोर्टों में सूत्रों के हवाले से बताया गया था।

तेजस्वी का सवाल था:

“जब प्रक्रिया अभी चल रही है और एक हफ्ते का समय बाकी है, तो 35 लाख नामों की जानकारी इतनी सटीक कैसे दी जा रही है? क्या यह सब पूर्व नियोजित है?”

उन्होंने कहा कि यदि प्रक्रिया अभी भी जारी है और बीएलओ अभी तक कई क्षेत्रों में नहीं पहुंचे हैं, तो ऐसे में अंतिम आंकड़ा कैसे तय हो सकता है? उन्होंने इस पर गंभीर संदेह जताया और चुनाव आयोग की पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

आरजेडी का आरोप: चयनित तरीके से नाम हटाए जा रहे

तेजस्वी यादव का कहना है कि यह पूरा अभियान निष्पक्ष नहीं है। उनका आरोप है कि चुनावी फायदों को देखते हुए चयनित जातियों और समुदायों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित कार्रवाई हो सकती है।

“ऐसे समय में जब राज्य में मतदाता जागरूक हो रहे हैं, उनके अधिकार छीने जा रहे हैं। बीएलओ का काम है घर-घर जाकर सत्यापन करना, लेकिन कई जगहों पर बीएलओ ने काम तक शुरू नहीं किया है,” तेजस्वी ने कहा।

चुनाव आयोग की स्थिति

वहीं राज्य चुनाव आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया नियमित है और हर साल मतदाता सूची का पुनरीक्षण किया जाता है। आयोग ने बताया कि अब तक 90 प्रतिशत से अधिक कार्य पूरा हो चुका है और अंतिम सूची 25 जुलाई, 2025 को तैयार हो जाएगी।

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के नाम हटाए जा रहे हैं, वे या तो दोहरे नाम, मृत, स्थानांतरित या फिर पुष्टि न किए गए मतदाता हैं। इसके लिए सभी आवश्यक कदम और सत्यापन किए जा रहे हैं।

राजनीतिक तापमान चढ़ा

तेजस्वी यादव के बयानों के बाद बिहार में सियासी माहौल गरमा गया है। जहां आरजेडी और विपक्ष इसे लोकतंत्र पर हमला बता रहे हैं, वहीं सत्ताधारी एनडीए गठबंधन इसे विपक्ष की राजनीति बता रहा है। बीजेपी नेताओं का कहना है कि तेजस्वी सिर्फ मीडिया में बने रहने के लिए बेवजह विवाद खड़ा कर रहे हैं।

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विवाद अभी थमता नजर नहीं आ रहा है। तेजस्वी यादव ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए राजनीतिक और कानूनी लड़ाई दोनों का संकेत दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इंडिया गठबंधन की बैठक में यह मामला किस स्तर तक उठाया जाता है और चुनाव आयोग इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *