बिहार में अपराध पर सियासी घमासान: पारस अस्पताल में हत्या के बाद गरमाया माहौल, ललन सिंह का बयान चर्चा में
बिहार में बढ़ते अपराधों को लेकर सियासी बयानबाज़ी तेज़ हो गई है। पटना के एक नामी निजी अस्पताल पारस हॉस्पिटल में गुरुवार, 17 जुलाई 2025 को दिनदहाड़े एक अपराधी की गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस घटना ने राज्य की कानून-व्यवस्था पर फिर से सवाल खड़े कर दिए हैं। विपक्ष हमलावर है और सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठा रहा है, वहीं सत्तारूढ़ पार्टी के नेता इसे ‘आपसी विवाद’ करार दे रहे हैं।
ललन सिंह ने दी सफाई, बोले – “आपसी झगड़ा भी अपराध कहलाएगा?”
घटना के बाद जब केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह से मुंगेर में पत्रकारों ने सवाल किए तो उन्होंने विवादित बयान दिया। ललन सिंह ने कहा,
“पहले के समय में कितने अपहरण होते थे? अब अगर हम और कोई व्यक्ति आपसी विवाद में एक-दूसरे को मार दें तो क्या वो अपराध कहलाएगा? यह आपसी रंजिश का मामला है। ऐसी घटनाएं दुनियाभर में होती हैं। फर्क यह है कि बिहार में तुरंत कार्रवाई होती है और अपराधी पकड़े जाते हैं।”
उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। विपक्ष का कहना है कि सरकार अपराध को हल्के में ले रही है और अपराधियों को खुली छूट दे दी गई है।
विपक्ष का हमला तेज़, पप्पू यादव ने की राष्ट्रपति शासन की मांग
घटना की जानकारी मिलते ही पूर्व सांसद पप्पू यादव अस्पताल पहुंच गए। हालांकि पुलिस ने उन्हें अस्पताल के अंदर जाने से रोक दिया। इस पर नाराज पप्पू यादव ने कहा:
“अब बिहार में किसी की जान सुरक्षित नहीं है। डॉक्टर, नर्स, आम आदमी सभी डरे हुए हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार चलाने में पूरी तरह नाकाम हो चुके हैं। बिहार में अब राष्ट्रपति शासन की ज़रूरत है। प्रशासन अपराधियों का संरक्षक बन चुका है। जाति के आधार पर अपराधियों को संरक्षण मिलता है और फर्जी एनकाउंटर किए जाते हैं।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नीतीश कुमार सिर्फ नाम के मुख्यमंत्री हैं, असली नियंत्रण भाजपा के हाथों में है।
कन्हैया कुमार का तंज – “बिहार में पानी नहीं, गोलियां बरस रही हैं”
कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने भी घटना को लेकर नीतीश सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा,
“बिहार में मानसून का मौसम है, लेकिन पानी कम और गोलियां ज़्यादा बरस रही हैं। पारस अस्पताल की घटना से यह साबित होता है कि राज्य में अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। अब कोई दिन ऐसा नहीं जाता जब बिहार में गोलीबारी की घटना ना होती हो। ये डबल इंजन की सरकार फेल हो चुकी है। बिहार को इस गुंडाराज से मुक्ति दिलानी होगी।”
पारस अस्पताल की घटना से दहशत
घटना के अनुसार, एक अपराधी को इलाज के लिए पटना के पारस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इसी दौरान कुछ हथियारबंद हमलावर अस्पताल में घुस आए और आईसीयू में ही उस व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। अस्पताल में अफरातफरी का माहौल बन गया और मरीज व स्टाफ सहम गए।
पुलिस का दावा है कि हत्या में शामिल हमलावरों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। हालांकि आम जनता और विपक्षी दलों का कहना है कि पुलिस की कार्रवाई केवल कागजों पर होती है और अपराधियों पर सख्त रोक नहीं लग पा रही।
बिहार में कानून-व्यवस्था को लेकर फिर से बहस छिड़ गई है। पारस अस्पताल की इस दिल दहला देने वाली घटना ने नीतीश सरकार की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े किए हैं। जहां सत्ता पक्ष इसे आपसी विवाद कहकर दबाने की कोशिश कर रहा है, वहीं विपक्ष इसे ‘गुंडाराज’ का नाम देकर सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहा है। जनता के बीच भी इस बात को लेकर चिंता गहराती जा रही है कि क्या बिहार में आम लोगों की जान-माल अब सुरक्षित है?
