राष्ट्रपति ने पंजाब सरकार के बिल को लौटा कर पंजाब सरकार को दिया बड़ा झटका

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पंजाब सरकार के एक बिल को नामंजूरी दे दी है। दरअसल पंजाब सरकार ने एक बिल में विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में राज्यपाल के स्थान पर मुख्यमंत्री की नियुक्ति चाही थी। यह बिल पिछले साल जून 2023 में पंजाब विधानसभा में पारित हुआ था। दरअसल यह मामला तब शुरू हुआ जब पंजाब के राज्यपाल बनवारीलाल पुरोहित ने बाबा फरीद यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज और पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वीसी की नियुक्ति में अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। इसके बाद पंजाब की आप सरकार ने पंजाब यूनिवर्सिटीज लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2023 पेश किया। जिसमे प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों में चांसलर के रूप में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को नियुक्त करने का प्रस्ताव था।

दरअसल पंजाब सरकार ने दिसंबर 2023 में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पास तीन बिल भेजे थे। जिसमे से एक बिल सिख गुरुद्वारा (संशोधन) विधेयक 2023, दूसरा बिल पंजाब पुलिस (संशोधन) विधेयक 2023 और तीसरा बिल पंजाब यूनिवर्सिटीज लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2023 था। संविधान के अनुच्छेद 200 के तहत, राज्य विधानसभा द्वारा पारित विधेयक को राज्यपाल की सहमति के लिए प्रस्तुत किया जाता है। जो इसे मंजूरी दे सकते हैं, सहमति रोक सकते हैं या राष्ट्रपति के विचार के लिए सुरक्षित रख सकते हैं।

कांग्रेस ने किया राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत

कांग्रेस पार्टी नेता राजकुमार वेरका ने राष्ट्रपति के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल को हटाकर मुख्यमंत्री को राज्य विश्वविद्यालयों का चांसलर बनाने के आम आदमी पार्टी के कदम को असवैधानिक बताया। राजकुमार वेरका ने कहा कि हम राष्ट्रपति के फैसले का स्वागत करते हैं।

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