भारत ने स्थायी रूप से की सिंधु जल संधि की समाप्ति, अमित शाह बोले – अब पाकिस्तान को पानी नहीं मिलेगा

भारत ने पाकिस्तान के साथ वर्ष 1960 में हुई सिंधु जल संधि को स्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला कर लिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि अब इस संधि को दोबारा बहाल नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने बार-बार इस समझौते की शर्तों का उल्लंघन किया, जिससे इसका मूल उद्देश्य समाप्त हो गया है।

अमित शाह का बड़ा बयान
टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए गए एक इंटरव्यू में गृह मंत्री ने कहा, “नहीं, यह (संधि) अब कभी बहाल नहीं होगी। अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पूरी तरह से खत्म करना आसान नहीं होता, लेकिन हमें इसे निलंबित करने का पूरा अधिकार था और हमने वह किया है।”

उन्होंने यह भी बताया कि यह संधि भारत और पाकिस्तान के बीच आपसी विश्वास, शांति और विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी, लेकिन जब पाकिस्तान ने ही इसकी मूल भावना को तोड़ दिया, तो इसका कोई औचित्य नहीं रह गया।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया गया बड़ा फैसला

भारत सरकार ने सिंधु जल संधि को निलंबित करने का निर्णय 22 अप्रैल को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद लिया, जिसमें 26 निर्दोष पर्यटकों की जान चली गई थी। इस हमले के बाद पूरे देश में गुस्से की लहर फैल गई थी और पाकिस्तान पर कड़ी कार्रवाई की मांग होने लगी थी।

सरकार ने इस हमले को गंभीरता से लेते हुए न सिर्फ सिंधु जल संधि को निलंबित किया, बल्कि पाकिस्तान के खिलाफ कई कूटनीतिक कदम भी उठाए। इनमें पाकिस्तानी नागरिकों का निष्कासन और अन्य रणनीतिक फैसले शामिल हैं।

हमले की निंदा में बोले अमित शाह

गृह मंत्री ने पहलगाम हमले को भारत की अखंडता और शांति के खिलाफ साजिश बताया। उन्होंने कहा, “यह हमला जानबूझकर कश्मीर में बढ़ते पर्यटक आगमन को रोकने के लिए किया गया। आतंकियों की मंशा यह थी कि कश्मीर के युवा विकास की दिशा से भटक जाएं। लेकिन अब घाटी के लोग पहले से कहीं ज्यादा भारत के साथ मजबूती से खड़े हैं।”

भारत की जवाबी कार्रवाई

अमित शाह ने यह भी दावा किया कि भारत ने इस आतंकी हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए पाकिस्तान के कई एयरबेस पर हमला किया, जिससे पाकिस्तान को सीजफायर की अपील करनी पड़ी। शाह ने कहा कि अब भारत किसी भी आतंकी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और इसका तत्काल और प्रभावी जवाब देगा।

क्या है सिंधु जल संधि?

सिंधु जल संधि 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी, जिसके तहत भारत को सतलुज, रावी और ब्यास नदियों का नियंत्रण मिला था, जबकि पाकिस्तान को झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों से पानी लेने की अनुमति दी गई थी। यह संधि अब तक लगभग 60 वर्षों तक बिना बाधा के चली, जिसे विश्व की सबसे सफल जल संधियों में माना जाता था।

लेकिन अब भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी नदियों का पानी पाकिस्तान को नहीं देगा, विशेष रूप से तब जब पाकिस्तान लगातार आतंकियों को समर्थन देकर भारत की शांति भंग करने की कोशिश करता है।

भारत का यह कदम न केवल कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि भारत अब अपनी संप्रभुता और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। अमित शाह के अनुसार, भारत अब “बोलकर नहीं, करके दिखाएगा”, और उसी दिशा में यह एक बड़ा और निर्णायक कदम है।

इस निर्णय से पाकिस्तान पर दबाव तो बढ़ेगा ही, साथ ही भारत की आतंकी हमलों के प्रति “जीरो टॉलरेंस नीति” भी पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट होगी।

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