राहुल गांधी के ‘सरेंडर मोदी’ बयान पर हिमंत बिस्वा सरमा का पलटवार, कांग्रेस को बताया देश के हितों से समझौता करने वाली पार्टी

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘सरेंडर मोदी’ कहने पर सियासत गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी कांग्रेस पर तीखा हमला बोल रही है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस मुद्दे पर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक लंबा पोस्ट साझा करते हुए कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं पर गंभीर आरोप लगाए।

हिमंत सरमा का पलटवार – ‘कौन करता रहा है सरेंडर?’

सरमा ने राहुल गांधी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें यह याद दिलाने की जरूरत है कि किस पार्टी ने भारत के राष्ट्रीय हितों और भूभाग को बार-बार गिरवी रखा है। उन्होंने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसी बड़ी सैन्य सफलता के बावजूद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री का मजाक उड़ाने की हिम्मत दिखाई।

नेहरू ने पीओके पाकिस्तान को दे दिया

असम के मुख्यमंत्री ने पंडित जवाहरलाल नेहरू को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा करते हुए कहा कि कश्मीर विवाद के दौरान जब भारतीय सेना पाकिस्तानी घुसपैठियों को पीछे धकेल रही थी, तब नेहरू संयुक्त राष्ट्र चले गए और सेना को रोक दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कदम ही वह कारण बना, जिससे आज पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके) अस्तित्व में है। उन्होंने कहा कि यह भारतीय सेना की सफलता की बलि चढ़ाने जैसा था।

‘1962 में बिना लड़े अक्साई चीन सौंपा गया

सरमा ने आगे कहा कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत ने बिना संघर्ष किए लगभग 38,000 वर्ग किलोमीटर भूमि चीन को दे दी। उन्होंने कहा कि उस समय जब चीन ने असम को धमकाया था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू ने केवल “असम के लोगों के लिए मेरी संवेदनाएं हैं” कहा था। यह बयान पूर्वोत्तर भारत को भाग्य के भरोसे छोड़ने जैसा था।

इंदिरा गांधी ने गंवा दिया 1971 की जीत का मौका

1971 के भारत-पाक युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि उस ऐतिहासिक जीत के बाद भारत के पास पाकिस्तान के 93,000 सैनिक बंदी बनाए गए थे। लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसका लाभ नहीं उठाया और पीओके को वापस लेने या किसी क्षतिपूर्ति की मांग किए बिना सभी सैनिकों को रिहा कर दिया। उन्होंने इसे एक बड़ी रणनीतिक चूक करार दिया।

परमाणु परीक्षण पर भी कांग्रेस पीछे हटी

सरमा ने 1995 में अमेरिका के दबाव में भारत के परमाणु परीक्षण को टालने के लिए भी कांग्रेस की आलोचना की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार पूरी तैयारी के बावजूद परीक्षण नहीं कर सकी, जबकि 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में भारत ने खुद को एक घोषित परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया।

‘26/11 पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई

मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले का जिक्र करते हुए सरमा ने कहा कि इस हमले में पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 166 निर्दोष भारतीयों की जान ली, लेकिन इसके बाद कांग्रेस सरकार की ओर से कोई सख्त प्रतिक्रिया नहीं दी गई। न कोई न्याय मिला, न जवाबदेही तय हुई, केवल चुप्पी रही।

पाकिस्तान को खुश करने की कोशिशें

असम के सीएम ने कहा कि कांग्रेस ने सीमाओं पर नरमी दिखाने के लिए पाकिस्तान के साथ गुप्त समझौते किए। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने आम जनता से सच्चाई छुपाई और ‘कूटनीति’ के नाम पर देश के साथ धोखा किया। उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस न तो सर्जिकल स्ट्राइक का समर्थन करती है, न बालाकोट एयरस्ट्राइक का, बल्कि हर बार सेना की उपलब्धियों पर सवाल उठाती है।

प्रधानमंत्री का अपमान करने की कोशिश

अंत में सरमा ने कहा कि जिस प्रधानमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की ताकत और साख को बढ़ाया, उस पर ‘सरेंडर मोदी’ जैसा अपमानजनक बयान देना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने इसे न केवल प्रधानमंत्री का, बल्कि पूरे देश का अपमान बताया।

यह बयान आने वाले दिनों में सियासी बहस को और तेज कर सकता है, खासकर तब जब ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जैसे मिशन को लेकर देश में राष्ट्रवाद का माहौल बना हुआ है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *