सीजफायर पर कांग्रेस ने उठाए सवाल: अशोक गहलोत बोले – “प्रधानमंत्री ने देश को निराश किया”
भारत-पाकिस्तान के बीच अचानक हुए सीजफायर समझौते को लेकर सियासत तेज हो गई है। इस विषय पर मंगलवार (13 मई) को कांग्रेस पार्टी की ओर से एक प्रेस कांफ्रेंस की गई, जिसमें वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने मोदी सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक दिन पहले राष्ट्र के नाम संबोधन को निराशाजनक बताया और कहा कि जनता को स्पष्टता की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।
“प्रधानमंत्री ने उम्मीदों पर पानी फेरा” – गहलोत
अशोक गहलोत ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन से लोगों को ठोस जवाबों की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने केवल सामान्य बातें कीं। उन्होंने कहा, “कुछ अच्छी बातें जरूर थीं, लेकिन अचानक हुए सीजफायर को लेकर देश को जो स्पष्टता चाहिए थी, वह नहीं मिली। सेना के पराक्रम की पूरी दुनिया तारीफ कर रही थी, जनता एकजुट थी और पाकिस्तान पर दबाव था, फिर सरकार ने क्यों पीछे हटने जैसा कदम उठाया?”
“हम युद्ध नहीं चाहते, पर पाकिस्तान को सबक ज़रूरी” – कांग्रेस
गहलोत ने साफ किया कि उनकी बातों का यह मतलब नहीं है कि कांग्रेस युद्ध चाहती है, बल्कि उन्होंने सवाल उठाया कि जब सेना ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान को करारा जवाब दे रही थी, तब अचानक युद्धविराम क्यों किया गया? उन्होंने कहा, “पहलगाम आतंकी हमले से देश दुखी था, सेना कार्रवाई कर रही थी और जनता साथ थी, फिर सरकार ने अचानक क्यों कदम पीछे खींच लिए?”
“इंदिरा गांधी के दौर की तुलना में मोदी सरकार क्यों झुक गई?”
गहलोत ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1971 के फैसलों की मिसाल देते हुए कहा, “तब अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन का दबाव भी बेअसर रहा था और भारत ने पाकिस्तान को हराकर बांग्लादेश का गठन कराया था। आज मोदी सरकार डोनाल्ड ट्रंप की एक धमकी पर सीजफायर कर रही है। क्या ट्रंप को भारत के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार है?”
“ट्रंप ने क्या ठेकेदारी ले रखी है?” – गहलोत का सवाल
गहलोत ने अमेरिका की भूमिका को लेकर तीखा सवाल करते हुए कहा, “डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान दोनों को बराबरी पर रखकर कश्मीर मुद्दे पर समाधान की बात की। यह न केवल खतरनाक है, बल्कि भारत की संप्रभुता पर भी सवाल है। ट्रंप का बयान प्रधानमंत्री मोदी के भाषण से ठीक पहले कैसे आ गया? क्या ये सिर्फ संयोग था?”
“हमें पाकिस्तान की ऐसी–तैसी कर देनी चाहिए थी”
गहलोत ने कहा कि पाकिस्तान बार-बार हमलों को अंजाम दे रहा है और भारत को यह दिखाना चाहिए था कि अब बर्दाश्त की सीमा खत्म हो गई है। “हमें पाकिस्तान की ऐसी-तैसी कर देनी चाहिए थी ताकि वह भविष्य में आतंक फैलाने की हिम्मत न करे। लेकिन सीजफायर के बाद भी पाकिस्तान ने उल्लंघन किया, फिर भी सरकार चुप है।”
“कौन–सा दबाव था मोदी सरकार पर?”
उन्होंने कहा कि देश जानना चाहता है कि ऐसा कौन-सा दबाव था जिससे सरकार को पीछे हटना पड़ा। “जब अमेरिका की ओर से पहला बयान आया, तभी सरकार को कह देना चाहिए था कि भारत अपने आतंरिक मामलों में किसी तीसरे देश की दखल को स्वीकार नहीं करता। लेकिन सरकार ने चुप्पी साध ली और इससे जनता में भ्रम पैदा हुआ।”
“पुलवामा हमले की सच्चाई अब तक सामने क्यों नहीं आई?”
गहलोत ने एक बार फिर पुलवामा हमले को लेकर सवाल उठाया और कहा कि अब तक यह पता नहीं चल पाया कि हमले में इतनी भारी मात्रा में आरडीएक्स कहां से आया। “यह सवाल अब भी अनुत्तरित है, और सरकार इससे लगातार बचती रही है। प्रधानमंत्री ने इस पर अब तक कोई ठोस जवाब नहीं दिया है।”
“सर्वदलीय बैठक से क्यों बचते रहे पीएम?”
गहलोत ने कहा कि जब विपक्ष खुलकर सरकार के साथ खड़ा था, तब भी प्रधानमंत्री मोदी सर्वदलीय बैठक से बचते रहे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के राजनीतिक दल एकजुट थे, तो सरकार ने अचानक फैसला क्यों पलट दिया?
“बीजेपी घबरा गई है, तिरंगा यात्रा कर रही है”
अंत में गहलोत ने कहा कि अमेरिकी हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के रुख को लेकर जो सवाल उठे हैं, उनसे बीजेपी घबरा गई है और अब राष्ट्रवाद के नाम पर तिरंगा यात्रा जैसी राजनीतिक गतिविधियों का सहारा ले रही है। उन्होंने पीएम मोदी के आदमपुर दौरे को “राजनीतिक संदेश देने की कोशिश” बताया और कहा कि “लोग जानना चाहते हैं कि रात के अंधेरे में आखिर यह समझौता कैसे हो गया?”
अशोक गहलोत के इन बयानों से स्पष्ट है कि कांग्रेस पार्टी सरकार के फैसले और अमेरिकी भूमिका को लेकर संतुष्ट नहीं है। विपक्ष अब लगातार यह सवाल उठा रहा है कि अगर सेना कार्रवाई कर रही थी और जनता सरकार के साथ थी, तो फिर अचानक सीजफायर क्यों हुआ? अब नजर इस पर है कि प्रधानमंत्री मोदी और सरकार इन सवालों का क्या जवाब देते हैं।
