बिहार चुनाव 2025: एनडीए और महागठबंधन में तेज हुई राजनीतिक हलचल, सर्वे में तेजस्वी यादव की बढ़त का दावा
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर सियासी हलचल अब तेजी पकड़ रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही रणनीति बनाने में जुट गए हैं और एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी तेज हो गया है। जहां एनडीए में सीट बंटवारे को लेकर गहन मंथन हो रहा है, वहीं विपक्षी महागठबंधन ने सर्वे के नतीजों के हवाले से दावा किया है कि जनता इस बार बदलाव चाहती है और तेजस्वी यादव के नेतृत्व में सरकार बनती नजर आ रही है।
राजद का दावा: सर्वे में दिखी तेजस्वी की लहर
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता मृत्युंजय तिवारी ने हाल ही में बयान दिया है कि अब तक 3 से 4 ओपिनियन पोल सामने आ चुके हैं, और सभी में यह संकेत मिला है कि तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बिहार में नई सरकार बन सकती है। उन्होंने यह दावा न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत के दौरान किया।
उन्होंने यह भी कहा कि इन सर्वे रिपोर्ट्स से साफ है कि जनता अब बदलाव चाहती है और नीतीश कुमार की अगुवाई वाली मौजूदा सरकार से नाराज़ है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और एनडीए चुनाव आयोग के माध्यम से चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कराने की कोशिश कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
राजद ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल उठाए हैं। मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि विपक्ष को डर है कि कहीं सत्तारूढ़ दल सरकारी संस्थाओं का दुरुपयोग कर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में न मोड़ ले। उनका कहना था कि तेजस्वी यादव ने हर मुद्दे पर तथ्यात्मक जानकारी दी है और चुनाव आयोग को इसका जवाब देना चाहिए।
इस बयान के जरिए यह स्पष्ट संकेत दिया गया कि महागठबंधन अब चुनाव आयोग की भूमिका पर भी नजर रखेगा और किसी भी गड़बड़ी की आशंका को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
एनडीए में सीट बंटवारे पर मंथन जारी
दूसरी ओर, बीजेपी और उसके सहयोगी दल – जनता दल यूनाइटेड (जदयू) और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – मिलकर चुनावी समीकरण बनाने में जुट गए हैं। इन दलों के बीच सीट बंटवारे को लेकर लगातार चर्चा हो रही है।
लोजपा (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान ने भी इस बात के संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी आगामी विधानसभा चुनावों में सक्रिय रूप से भाग लेगी। इससे यह स्पष्ट है कि एनडीए में अभी सब कुछ तय नहीं है और अंदरूनी रणनीति पर काम जारी है।
बीजेपी की कोशिश है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व में गठबंधन एकजुट होकर चुनाव लड़े और पुनः सत्ता में वापसी करे। इसके लिए भाजपा अपनी रणनीति को धार दे रही है और सहयोगियों को संतुलित रखने की कोशिश कर रही है।
राजनीतिक माहौल गर्म, जनता की भूमिका अहम
बिहार की राजनीति में जनता हमेशा निर्णायक भूमिका निभाती है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगा कि चुनाव का रुख किस ओर जाएगा। हालांकि, ओपिनियन पोल महज एक संकेत होते हैं, असली परीक्षा तो वोटिंग के दिन होगी।
विपक्षी महागठबंधन का दावा है कि युवाओं, किसानों और बेरोजगारी के मुद्दों पर जनता सरकार से नाराज़ है और इस बार तेजस्वी यादव को मौका देना चाहती है। वहीं, एनडीए का कहना है कि उन्होंने राज्य में विकास कार्य किए हैं और जनता उनके कामकाज को पसंद कर रही है।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में अभी समय है, लेकिन सियासी गलियारों में गर्मी अभी से महसूस की जा रही है। एक ओर जहां महागठबंधन अपने पक्ष में हवा का दावा कर रहा है, वहीं एनडीए पूरी तैयारी के साथ चुनावी मैदान में उतरने की रणनीति बना रहा है। सर्वे रिपोर्ट्स भले ही विपक्ष को बढ़त दिखा रही हों, लेकिन अंतिम फैसला जनता के वोट से ही तय होगा।
आगामी महीनों में बिहार की राजनीति में और भी कई उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं, लेकिन यह तय है कि यह चुनाव एक बार फिर राज्य की राजनीति की दिशा और दशा तय करेगा।
