पिछले दस साल से लगातार जमानत की कोशिश कर रहे आशाराम बापू को आखिरकार जोधपुर अदालत से जमानत मिली, लेकिन जेल में ही रहेंगे आशाराम बापू

आशाराम बापू पिछले 10 साल से जेल में बंद हैं। उन्हें 2013 में अपने ही गुरुकुल की नाबालिग बालिका के साथ यौन उत्पीड़न के आरोप में जेल हुयी थी। इन दस सालों में आशाराम बापू ने कई बार जमानत की अर्जी दी लेकिन कोर्ट ने हर बार उनकी जमानत की अर्जी को ख़ारिज कर दिया। आशाराम बापू यौन उत्पीड़न में मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं।

दरसअल आशाराम को राजस्थान हाई कोर्ट ने फर्जी दस्तावेज प्रकरण में जमानत दी है। इस जमानत के बाद भी आशाराम जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे। न्यायमूर्ति कुलदीप माथुर ने इस मामले की सुनवाई करते हुए जमानत के आदेश दिए।

ये है पूरा मामला

उल्लेखनीय है कि 2017 में आशाराम की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जोधपुर सेंट्रल जेल की डिस्पेंसरी का एक मेडिकल प्रमाण पत्र दाखिल किया गया। जिसमे आशाराम को विभिन्न विभिन्न प्रकार की कई गंभीर बिमारियों का जिक्र था। जब सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रमाण पत्र की जांच कराई तो जांच में यह प्रमाण पत्र फर्जी पाया गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जोधपुर के रातानाडा थाने में आशाराम के पैरोकार रवि राय पर एफआईआर दर्ज कराई गयी। इस मामले में आशाराम को भी आरोपी बनाया गया। इस मामले में आशाराम को 18 जनवरी को सीजेएम मेट्रो कोर्ट में पेश किया गया जहाँ उन्हें उन पर लगे आरोप सुनाये गए। इसके बाद आशाराम के वकील ने हाई कोर्ट में जमानत की याचिका दी। उसी याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुयी थी। जिसमे फर्जी दस्तावेज प्रकरण में आशाराम को जमानत मिली है। लेकिन इस जमानत के बाद भी आशाराम जेल से बाहर नहीं आ पायेगा।

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