लोकसभा चुनाव के लिए यूपी में अखिलेश यादव की नयी रणनीति बढ़ा सकती है कांग्रेस की मुश्किलें

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव से शुरू हुयी समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच की नाराजगी अभी ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही है। हालाँकि दावा किया जा रहा था कि दोनों दलों के बीच की नाराजगी लोकसभा चुनाव से पहले ख़त्म हो जाएगी और इंडिया गठबंधन एकजुट होकर लोकसभा चुनाव लड़ेगा। लेकिन दोनों ही दल लोकसभा चुनाव के लिए अपनी अलग ही रणनीति पर काम कर रहे हैं। यदि किसी भी वजह से इंडिया गठबंधन टूटता है तो कांग्रेस के लिए यूपी में मुश्किल खड़ी हो सकती है।

समाजवादी पार्टी एमपी का बदला कांग्रेस से यूपी में ले सकती है। जानकारी के अनुसार समाजवादी पार्टी ने रायबरेली और अमेठी के लिए मजबूत प्रत्याशी की खोज शुरू कर दी है। सपा के एक वरिष्ठ नेता ने जानकारी दी है कि अगर गठबंधन नहीं होता है तो सपा रायबरेली और अमेठी में अपने प्रत्याशी उतार सकती है। वहीं कांग्रेस भी यूपी में सभी सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है।

कांग्रेस के गढ़ में सपा उतार सकती है प्रत्याशी

रायबरेली और अमेठी को कांग्रेस पार्टी का गढ़ माना जाता है। रायबरेली कांग्रेस नेता सोनिया गाँधी का संसदीय क्षेत्र है। वही अमेठी से राहुल गाँधी चुनाव लड़ते रहे हैं। हालाँकि 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता राहुल गाँधी को बीजेपी नेता स्मृति ईरानी के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद राहुल गाँधी इस बार फिर से अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। यदि लोकसभा चुनाव 2024 में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन नहीं हुआ और सपा ने रायबरेली और अमेठी से अपने प्रत्याशी चुनाव में उतारे तो कांग्रेस के लिए इन दोनों सीटों से जीतना मुश्किल हो जायेगा।

खबरों की मानें तो समाजवादी पार्टी रायबरेली में ऊंचाहार से विधायक मनोज पांडेय के नाम पर विचार कर रही है। वहीँ अमेठी में गौरीगंज से विधायक राकेश प्रताप सिंह के नाम पर विचार कर रही है। अब तक समाजवादी पार्टी इन दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी नहीं उतारती थी। इसी तरह कांग्रेस भी यादव परिवार की सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने से परहेज करती आयी है।

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