12 जून को होने वाली विपक्षी एकता की बैठक टली, क्या कांग्रेस को स्वीकार नहीं है नितीश कुमार का नेतृत्व

बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार की विपक्षी एकता की बैठक जो कि 12 जून को पटना में होनी थी। आगे के लिए टल गयी है। यह बैठक लगातार तीसरी बार टली है। इस बैठक को लेकर चर्चा है कि कांग्रेस को नितीश कुमार का नेतृत्व पसंद नहीं है। लेकिन नितीश कुमार ने बैठक टलने की वजह बताते हुए कहा कि कांग्रेस के आलाकमान नेता 12 जून को होने वाली बैठक में सम्मलित नहीं हो पा रहे थे। इसलिए इस बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया है। अब विपक्षी एकता की बैठक कब होगी इस पर असमंजस है। सभी विपक्षी दल इस बात पर भी सहमत नहीं थे कि बैठक पटना में हो। अब बैठक की जगह को भी लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।

नितीश कुमार के नेतृत्व को लेकर भी असमंजस

लोकसभा चुनावों से पहले जब विपक्षी एकता की सुगबुगाहट शुरू हुयी तो नितीश कुमार ने विपक्षी एकता का जिम्मा अपने ऊपर ले लिया। इसके बाद उन्होंने विपक्षी दलों के नेताओं से बात करना और मिलना शुरू किया।

जब तेलंगाना के मुख्यमंत्री केसीआर नितीश कुमार से मिलाने पटना पहुंचे थे। इस मुलाकात के बाद जब दोनों नेताओं के पूछा गया कि विपक्षी एकता का नेता कौन होगा तो इसके जवाब में नितीश कुमार ने चुप्पी साध ली। लेकिन केसीआर ने कहा कि अभी यह नहीं कहा जा सकता कि नेता कौन होगा। उन्होंने नितीश कुमार के नाम पर भी मना कर दिया था। इसके बाद भी नितीश कुमार ने अपनी कोशिशें नहीं रोकी। वे मई 2023 को ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मिलने ओडिशा पहुंचे। लेकिन नवीन पटनायक ने विपक्षी एकता पर कोई बात नहीं की। नितीश कुमार को ओडिशा से बैरन ही लौटना पड़ा। इसके बाद जदयू के राष्ट्रिय अध्यक्ष ललन सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि नितीश कुमार की नवीन पटनायक से पुरानी दोस्ती थी। इसलिए वे उनसे मिलने गए थे। विपक्षी एकता के नेतृत्व पर नितीश कुमार के नाम पर शुरू से ही ग्रहण लगा हुआ था।

कांग्रेस को स्वीकार नहीं है किसी और के नेतृत्व में बैठक

विपक्षी एकता की बैठक का पटना में होना कांग्रेस को पसंद नहीं है। क्योकि बैठक पटना में होती है तो बैठक का नेतृत्व नितीश कुमार करेंगे जो कि कांग्रेस और राहुल गाँधी को बिल्कुल भी मंजूर नहीं है। कांग्रेस पार्टी किसी दूसरे की अध्यक्षता में विपक्षी एकता की बैठक में हिस्सा लेना नहीं चाहेगी।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि कांग्रेस पार्टी एक राष्ट्रिय पार्टी है और राहुल गाँधी उस पार्टी के नेता हैं। वह आने वाले समय में भारत के प्रधानमंत्री भी बनेंगे। ऐसे में कांग्रेस पार्टी को बिल्कुल भी स्वीकार नहीं होगा कि किसी क्षेत्रीय दल का नेता उनका नेतृत्व करे। इसलिए कांग्रेस पार्टी के आलाकमान नेताओं ने इस बैठक के लिए कोई भी दिलचस्पी नहीं दिखायी।

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