पंजाब में नई रणनीति के साथ उतरी बीजेपी, मिशन 2027 पर फोकस
पश्चिम बंगाल में मिली बड़ी चुनावी सफलता के बाद भारतीय जनता पार्टी अब पंजाब में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी में जुट गई है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि पंजाब में भी संगठन को मजबूत करके भविष्य में सत्ता तक पहुंचा जा सकता है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बीजेपी ने राज्य में अलग रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पंजाब में पार्टी के प्रचार अभियान का मुख्य चेहरा होंगे।
बीजेपी का मानना है कि केंद्र सरकार द्वारा सिख समुदाय के लिए किए गए कार्यों और योजनाओं को जनता के बीच ले जाकर पार्टी अपनी पकड़ मजबूत कर सकती है। वहीं अमित शाह संगठन और चुनावी रणनीति को धार देने का काम करेंगे। पार्टी इस बार पंजाब में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और इसके लिए बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का अभियान चलाया जा रहा है।
पंजाब की राजनीति में अलग तरीके से काम कर रही बीजेपी
पंजाब की राजनीति देश के कई अन्य राज्यों से अलग मानी जाती है। यहां धार्मिक ध्रुवीकरण या जातीय मुद्दे हमेशा प्रभावी नहीं रहते। यही वजह है कि बीजेपी राज्य में अलग-अलग वर्गों के लिए अलग रणनीति तैयार कर रही है। पार्टी का विशेष फोकस युवाओं, महिलाओं, दलितों और ओबीसी समुदाय पर है।
पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी को केवल दो सीटें मिली थीं और उसका वोट प्रतिशत भी सीमित रहा था। हालांकि लोकसभा चुनाव में पार्टी को वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी देखने को मिली, जिससे कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ा है। पार्टी नेताओं का मानना है कि अगर संगठन को गांव और बूथ स्तर तक मजबूत किया जाए तो आने वाले समय में बेहतर परिणाम मिल सकते हैं।
बीजेपी ने हाल ही में अन्य दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोड़ने का अभियान भी तेज किया है। पार्टी का उद्देश्य यह दिखाना है कि पंजाब में वह एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है। इसके लिए लगातार रैलियां, जनसभाएं और संगठनात्मक बैठकें आयोजित की जा रही हैं।
नशा, महिलाओं और धर्मांतरण के मुद्दों पर सरकार को घेरेगी बीजेपी
पंजाब में नशे की समस्या लंबे समय से बड़ा मुद्दा रही है। बीजेपी अब इसी मुद्दे को प्रमुख चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी में है। पार्टी का कहना है कि राज्य के कई युवा नशे की गिरफ्त में हैं और इसका असर परिवारों पर भी पड़ रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अमित शाह राज्य में “नशा मुक्त पंजाब” अभियान को आगे बढ़ा सकते हैं।
सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व आने वाले समय में पंजाब के लगातार दौरे करेगा और युवाओं के बीच पहुंच बनाने की कोशिश करेगा। बीजेपी महिलाओं को लेकर भी कई योजनाओं और आर्थिक सहायता जैसे वादों पर विचार कर रही है। पार्टी का आरोप है कि राज्य सरकार ने महिलाओं से जुड़े कई वादे किए लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया।
इसके अलावा धर्मांतरण का मुद्दा भी बीजेपी के अभियान का हिस्सा बनने जा रहा है। अमित शाह पहले भी कह चुके हैं कि अगर पंजाब में बीजेपी की सरकार बनती है तो धर्मांतरण के खिलाफ कानून लाया जाएगा। पार्टी का मानना है कि इस मुद्दे के जरिए वह सिख और हिंदू मतदाताओं को अपने पक्ष में ला सकती है।
दलित और ओबीसी वोट बैंक पर भी नजर
पंजाब में दलित आबादी बड़ी संख्या में है और यही कारण है कि बीजेपी इस वर्ग तक पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रही है। पार्टी धार्मिक और सामाजिक डेरों के जरिए समाज के विभिन्न वर्गों से संपर्क साध रही है। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविदास जयंती के अवसर पर डेरा सचखंड बल्लां का दौरा भी किया था। वहां उन्होंने डेरा प्रमुख निरंजन दास महाराज से मुलाकात की थी।
बीजेपी का मानना है कि दलित और ओबीसी समुदाय के बीच मजबूत पकड़ बनाकर पंजाब की राजनीति में अपनी स्थिति बेहतर की जा सकती है। इसी उद्देश्य से पार्टी सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ संपर्क बढ़ा रही है। आने वाले समय में बीजेपी पंजाब में बड़े स्तर पर अभियान चलाकर खुद को एक मजबूत राजनीतिक विकल्प के रूप में पेश करने की तैयारी में है।
