राजनैतिक गलियारों में फिर विपक्षी एकता की सुरबुहात शुरू हो गयी है भाजपा बनाम एकजुट विपक्ष

2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों की तैयारी में विपक्ष सरकार के विरुद्ध अभी से तैयारी लग गया है। राजनैतिक गलियारों से खबर उड़ना शुरू हो गयी है कि इस बार समस्त विपक्ष एक हो कर भाजपा के खिलाप लड़े जिससे भाजपा को सत्ता में आने से रोका जा सके। इसी तैयारी में जदयू और कांग्रेस के बीच की बर्फ पिघल गयी है। आखिरकर जदयू नेता नितीश कुमार और कांग्रेस नेता राहुल गाँधी की मुलाकात हो ही गई। इस मुलाकात में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन और राजद नेता तेजस्वी यादव मौजूद रहे। इस बार विपक्ष को एक जुट करने की कमान नितीश कुमार ने संभाली है। उनकी योजना है कि लोकसभा चुनाव में सयुक्त विपक्ष का एक ही उम्मीदवार भाजपा के खिलाप उतरे।

हालाँकि यह कोई चौकाने वाली बात नहीं है, ऐसा पहले भी हो चूका है आज से पहले 1977 और 1989 में भी ऐसा हो चुका है लेकिन तब परिस्थियाँ और थी। उस समय कांग्रेस सर्व शक्तिशाली पार्टी थी जो की आज भाजपा है। राजनैतिक परिस्थितियों के हिसाब से तीन तरह के राज्य है जहाँ पर भजपा का समीकरण यह है किसी राज्य में तो भाजपा का मुकावला सीधे एक पार्टी से है, किसी राज्य में भाजपा का मुकावला एक से ज्यादा पार्टियों से है और कही पर छोटी छोटी पार्टियों का आपस में मुकावला है। ऐसे में नितीश कुमार की यह मंशा कितनी कामयाब हो पायेगी कि सत्ता पक्ष के खिलाप विपक्ष का एक उम्मीदवार मैदान में उतारा जाये। कुछ भी कहना मुश्किल है। लेकिन कोशिश करने में क्या हर्ज है।

इससे पहले नितीश कुमार कई बार यह कह चुके थे कि कांग्रेस को पहल करनी चाहिए बात करनी चाहिए। अब राहुल गाँधी और नितीश कुमार की मुलाकात भी हो गयी है। इसके बाद नितीश और कांग्रेस ने सयुंक्त रूप से घोषणा कर दी कि अब हम एक साथ हैं। अब केवल रणनीति तय करना बाकी है वह भी जल्द ही हो जाएगी। अब यह देखा जाये कि अभी तक ममता बैनर्जी इसमें कही भी नजर नहीं आयी हैं।

लेकिन विपक्षी एकता पर सबसे बड़ा प्रश्न तो यह उठता है कि विपक्षी एकता की अगुवाई कौन करेगा। यह सबसे बड़ा अड़ंगा है। कांग्रेस पार्टी अपने नेता को आगे बढ़ाना चाहती है, नितीश कुमार के अपने ही सपने हैं, ममता बैनर्जी अपनी मंशा जाहिर करेंगी। ऐसे में चुनाव बाद भी विखराब बना रहता है। ऐसे में भाजपा अपने पत्ते बखूबी चलना जानती है।

फ़िलहाल पूरा दारोमदार इस पर रहेगा कि किस पार्टी को कितनी सीट मिलती हैं। अब आगे देखना होगा की नितीश और राहुल गाँधी मिलकर इस विपक्षी एकता को कहाँ तक लेके जा सकते है।

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