भारत और तुर्किए के बीच रिश्ते इन दिनों खासे तनावपूर्ण हो गए हैं। इसकी मुख्य वजह बनी है भारत द्वारा पाकिस्तान पर किए गए “ऑपरेशन सिंदूर” के दौरान तुर्किए का पाकिस्तान को खुलकर समर्थन देना। अब भारत ने कूटनीतिक तौर पर तुर्किए को चारों ओर से घेरने की तैयारी शुरू कर दी है। इसी रणनीति के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्द ही तुर्किए के पुराने दुश्मन साइप्रस की यात्रा करने वाले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी 15 से 17 जून के बीच कनाडा के कनानस्किस शहर में आयोजित होने वाले G-7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे। लेकिन उससे पहले वे साइप्रस जाएंगे और वापसी में क्रोएशिया होते हुए भारत लौटेंगे। हालांकि पीएम मोदी के इस दौरे को लेकर आधिकारिक तौर पर ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन इसे तुर्किए के लिए एक स्पष्ट संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।
तुर्किए ने पाकिस्तान को भेजे थे हथियार और ड्रोन
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। भारत ने इसका करारा जवाब देते हुए 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी संगठनों के 9 ठिकानों को तबाह किया गया।
भारत की इस कार्रवाई से पहले ही तुर्किए ने पाकिस्तान की मदद करना शुरू कर दिया था। 5 मई को तुर्की का एक युद्धपोत कराची बंदरगाह पर देखा गया, जबकि इससे एक दिन पहले तुर्की का C-130 मिलिट्री एयरक्राफ्ट भी कराची पहुंचा था। खबरें हैं कि तुर्किए ने पाकिस्तान को ड्रोन, मिसाइलें और उन्हें ऑपरेट करने वाले विशेषज्ञ भी भेजे।
तुर्किए की नाराज़गी के बीच मोदी की साइप्रस यात्रा
तुर्किए के इस खुले समर्थन के बाद भारत ने कूटनीतिक स्तर पर उसे घेरने का निर्णय लिया। इसी क्रम में पीएम मोदी का साइप्रस दौरा बेहद अहम माना जा रहा है। साइप्रस और तुर्किए के बीच विवाद 1974 से चला आ रहा है, जब तुर्किए ने साइप्रस के उत्तरी हिस्से पर कब्ज़ा कर लिया था। इसके बाद से साइप्रस दो हिस्सों में बंट गया — एक पर ग्रीक साइप्रट सरकार का नियंत्रण है, जिसे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है, और दूसरा हिस्सा तुर्की साइप्रट्स के कब्जे में है, जिसे केवल तुर्किए मान्यता देता है।
साइप्रस के मशहूर पर्यटन स्थल वरोशा पर भी तुर्किए ने कब्जा कर लिया था, जो अब वीरान पड़ा है और वहां हजारों तुर्की सैनिक तैनात हैं।
पीएम मोदी बनेंगे तीसरे भारतीय प्रधानमंत्री जो साइप्रस जाएंगे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के तीसरे ऐसे प्रधानमंत्री होंगे जो साइप्रस की यात्रा करेंगे। इससे पहले 2002 में अटल बिहारी वाजपेयी और 1983 में इंदिरा गांधी ने साइप्रस दौरा किया था। पीएम मोदी की यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि साइप्रस को अगले वर्ष यूरोपीय यूनियन की छह महीने की अध्यक्षता मिलने की संभावना है।
भारत, साइप्रस और क्रोएशिया के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को और मज़बूत कर तुर्किए को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अलग-थलग करना चाहता है। यह रणनीति वैश्विक राजनीति में भारत की एक मजबूत छवि प्रस्तुत करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।
तुर्किए का पाकिस्तान को हथियार और ड्रोन भेजना भारत के लिए सीधे तौर पर चुनौती बनकर उभरा है। इसके जवाब में भारत ने रणनीतिक रूप से उसके दुश्मन साइप्रस से संबंध मजबूत करने का रास्ता चुना है। पीएम मोदी का यह दौरा केवल एक औपचारिक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि तुर्किए को एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अब हर स्तर पर अपने विरोधियों का जवाब देगा — चाहे वह सैन्य हो या कूटनीतिक।
