देश के पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों के नतीजों की तस्वीर अब काफी हद तक साफ हो चुकी है। इन चुनावों में पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी शामिल हैं। इस बार के चुनाव कई मायनों में खास रहे, क्योंकि कुछ राज्यों में नई राजनीतिक ताकतें उभरकर सामने आईं, तो कहीं पुरानी पार्टियों ने अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखी।
पश्चिम बंगाल में कड़ा मुकाबला और बड़ा जनादेश
पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव काफी दिलचस्प रहा। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से 293 सीटों पर ही वोटों की गिनती हुई। यहां मतदान दो चरणों में हुआ था—पहला चरण 23 अप्रैल को 152 सीटों पर और दूसरा चरण 29 अप्रैल को 142 सीटों पर संपन्न हुआ।
इस बार करीब 92 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो बेहद अधिक माना जा रहा है। चुनाव का मुख्य केंद्र भवानीपुर सीट रही, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव मैदान में थीं। उनके सामने बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी ने कड़ी चुनौती पेश की।
ममता बनर्जी जहां लगातार चौथी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रही थीं, वहीं भारतीय जनता पार्टी इस बार पहली बार राज्य में सरकार बनाने की पूरी कोशिश में दिखी। नतीजों ने यह साफ कर दिया कि राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव हो रहा है।
असम में बीजेपी की वापसी की कोशिश
असम में सभी 126 सीटों पर 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था। यहां इस बार 85 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई, जो रिकॉर्ड स्तर के करीब है।
राज्य में बीजेपी हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है। वहीं कांग्रेस गौरव गोगोई के नेतृत्व में चुनाव लड़ रही है। यहां मुकाबला काफी कड़ा रहा और दोनों प्रमुख दलों ने जीत के लिए पूरी ताकत लगाई।
तमिलनाडु में त्रिकोणीय मुकाबला
तमिलनाडु की 234 विधानसभा सीटों के लिए 23 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ था। इस बार राज्य में 85 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ, जो पिछले चुनावों की तुलना में अधिक है।
यहां एम के स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके गठबंधन तीसरी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रहा है। दूसरी ओर एआईएडीएमके भी सत्ता हासिल करने के लिए पूरी ताकत से मैदान में है। इस चुनाव की खास बात यह रही कि अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके के मैदान में उतरने से मुकाबला त्रिकोणीय हो गया, जिससे चुनाव और ज्यादा रोचक बन गया।
केरल और पुडुचेरी में भी कड़ी टक्कर
केरल की 140 विधानसभा सीटों के लिए 9 अप्रैल को मतदान हुआ था, जिसमें 78.27 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यहां मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने की कोशिश कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन सरकार बनाने के लिए प्रयासरत है।
इसके अलावा पुडुचेरी की 30 सीटों पर भी 9 अप्रैल को मतदान हुआ था। यहां करीब 89.97 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई, जो काफी अधिक है।
कुल मिलाकर, इन पांच राज्यों के चुनावों ने देश की राजनीति को नई दिशा देने का संकेत दिया है। कहीं सत्ता की वापसी की कोशिश है तो कहीं बदलाव की लहर देखने को मिल रही है। अब सभी की नजरें अंतिम नतीजों और सरकार गठन पर टिकी हुई हैं।
