कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत पर आरोप, कहा सबसे पहले हिन्दू धर्म में भेदभाव का मुद्दा उठाया था
सनातन धर्म पर जारी बहस के बीच कांग्रेस ने दावा किया है कि सनातन धर्म में भेदभाव का मुद्दा सबसे पहले आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत ने उठाया था। दरअसल बीजेपी तमिलनाडु के मंत्री और द्रमुक नेता उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए विवादित बयान को लेकर इंडिया गठबंधन पर निशाना साध रही है। यही सब देखते हुए कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने रविवार 17 सितंबर को कहा, “सनातन धर्म को लेकर विवाद सबसे पहले तब शुरू हुआ जब आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कुछ दिन पहले हिंदू धर्म में भेदभाव का मुद्दा उठाया।”
पवन खेड़ा ने कहा “यह मुद्दा मोहन भागवत के बयान से शुरू हुआ। उन्होंने ही 15 दिन पहले बोला था कि हमने 2000 साल तक शोषण किया है। उन्होंने ये बात हिंदू धर्म के विषय पर कही।” दरअसल पवन खेड़ा हैदराबाद में दो दिवसीय कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के बाद बोल रहे थे। हिंदुस्तान टाइम्स के अनुसार पवन खेड़ा आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत के एक हालिया बयान का जिक्र कर रहे थे जिसमे मोहन भागवत ने कहा था कि जब तक समाज में आरक्षण जारी रखा जाये, जब तक समाज में भेदभाव है।
मोहन भागवत का बयान
आरआरएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा था, “हमने अपने ही साथियों को सामाजिक व्यवस्था में पीछे रखा। हमने उनकी परवाह नहीं की और ये 2000 वर्षों तक जारी रहा। जब तक हम उन्हें समानता प्रदान नहीं करते, तब तक कुछ विशेष उपाय करने होंगे और आरक्षण उनमें से एक है। इस तरह का भेदभाव होने तक आरक्षण जारी रहना चाहिए। हम आरएसएस में संविधान में दिए गए आरक्षण को पूरा समर्थन देते हैं।”
इससे पहले पवन खेड़ा ने कहा कि पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने पार्टी नेताओं को “बीजेपी के अप्रासंगिक जाल में फंसने” के खिलाफ चेतावनी दी है। खेड़ा ने कहा, “राहुल गांधी ने वैचारिक स्पष्टता की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने हमें बीजेपी के अप्रासंगिक जाल में फंसने से आगाह किया।”
