पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता क्यों हुई विफल? सामने आई बड़ी वजह

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच अहम बातचीत आखिरकार सफल नहीं हो सकी। इस बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा था, लेकिन कुछ महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण यह वार्ता अधूरी रह गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूरेनियम संवर्धन (न्यूक्लियर इनरिचमेंट) को लेकर दोनों देशों के बीच बड़ा मतभेद सामने आया, जो इस असफलता की मुख्य वजह बना।

यूरेनियम संवर्धन पर नहीं बनी सहमति

इस बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा यूरेनियम संवर्धन को लेकर था। अमेरिका ने प्रस्ताव रखा कि ईरान कम से कम 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन पर रोक लगाए। वहीं, तेहरान ने केवल 5 साल तक ही इस प्रक्रिया को रोकने की बात कही।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के अधिकारियों का कहना था कि वे सीमित समय के लिए ही इस तरह की शर्त स्वीकार कर सकते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी प्रशासन को चिंता थी कि यदि लंबी अवधि तक रोक नहीं लगाई गई, तो ईरान भविष्य में परमाणु हथियार बनाने की क्षमता हासिल कर सकता है। यही वजह रही कि दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन सकी।

हालांकि, विदेश मामलों के विशेषज्ञ इयान ब्रेमर का मानना है कि दोनों देश 12.5 साल के किसी मध्य रास्ते पर सहमत हो सकते हैं। इससे संकेत मिलता है कि बातचीत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है और भविष्य में समझौते की संभावना अभी भी बनी हुई है।

होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना विवाद का कारण

यूरेनियम के अलावा एक और बड़ा मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य था। यह क्षेत्र वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने इस जलमार्ग को बंद कर रखा था, जबकि अमेरिका इसे फिर से खोलने के पक्ष में था।

इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच स्पष्ट सहमति नहीं बन सकी। अमेरिका चाहता था कि इस मार्ग को तुरंत खोला जाए, जबकि ईरान इस पर व्यापक समझौते के तहत ही कोई फैसला लेना चाहता था। इस वजह से वार्ता और अधिक जटिल हो गई।

बैठक में बढ़ा तनाव, समझौता होतेहोते रह गया

सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद में हुई यह बैठक काफी तनावपूर्ण माहौल में हुई। बताया गया कि बातचीत के दौरान ईरान के विदेश मंत्री का रुख भी काफी सख्त हो गया था। उन्होंने अमेरिकी प्रतिनिधियों से भरोसे को लेकर सवाल उठाए और पिछली बैठकों का हवाला दिया।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई थी कि बैठक के दौरान ब्रेक लेना पड़ा। इस दौरान दोनों पक्षों ने अपने-अपने देशों से संपर्क किया। पाकिस्तान के अधिकारियों ने माहौल को शांत करने की कोशिश भी की, लेकिन कोई खास सफलता नहीं मिली।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों पक्ष लगभग 80% समझौते तक पहुंच चुके थे। लेकिन अंतिम समय में कुछ नए प्रस्ताव सामने आए, जिन पर सहमति नहीं बन सकी और बातचीत टूट गई।

आगे क्या हो सकता है?

हालांकि यह वार्ता असफल रही, लेकिन संकेत मिल रहे हैं कि दोनों देशों के बीच बैक-चैनल बातचीत जारी है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले समय में फिर से आमने-सामने की बैठक हो सकती है।

कुल मिलाकर, यह साफ है कि दोनों देश समझौता करना चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी और कुछ बड़े मुद्दों पर मतभेद अभी भी रास्ते में बाधा बने हुए हैं।

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