ऑपरेशन सिंदूर पर विपक्षी दबाव तेज, कांग्रेस से नाराज आप ने इंडिया गठबंधन से बनाई दूरी

ऑपरेशन सिंदूर को लेकर देश की सियासत में हलचल मची हुई है। इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगते हुए विपक्षी पार्टियों ने संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग तेज कर दी है। वहीं, विपक्षी एकता के प्रतीक माने जा रहे इंडिया गठबंधन में अब फूट की खबरें सामने आ रही हैं। आम आदमी पार्टी (आप) ने इस मुद्दे पर कांग्रेस के साथ खड़े होने से इनकार कर दिया है और कहा है कि वह प्रधानमंत्री को एक अलग चिट्ठी लिखेगी जिसमें संसद के विशेष सत्र की मांग होगी, लेकिन उसमें कांग्रेस की कोई भूमिका नहीं होगी।

आप ने कांग्रेस के साथ खड़े होने से किया इनकार

आम आदमी पार्टी की ओर से साफ कर दिया गया है कि वह कांग्रेस के साथ गठबंधन में शामिल नहीं होगी। पार्टी का कहना है कि अगर विशेष सत्र की मांग के लिए कोई साझा मंच बनता है, तो उसमें कांग्रेस की उपस्थिति आपत्तिजनक है। इसलिए आप पार्टी अब खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अलग से पत्र लिखकर विशेष सत्र बुलाने की मांग करेगी।

यह घटना उस वक्त सामने आई है जब इंडिया गठबंधन की ओर से 16 दलों ने एक साझा पत्र में संसद का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। इस पत्र में ऑपरेशन सिंदूर, जम्मू-कश्मीर में आतंकवादी हमले और अमेरिका द्वारा घोषित सीजफायर पर खुली चर्चा की मांग की गई है।

दिल्ली चुनाव में बढ़ी थी कांग्रेसआप के बीच तल्खी

आप और कांग्रेस के बीच नाराजगी नई नहीं है। दोनों दलों के बीच तनाव की शुरुआत दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। दोनों ने चुनाव में अलग-अलग उतरने का फैसला किया, जिसका नुकसान अंततः आप को उठाना पड़ा। आम आदमी पार्टी की हार का एक बड़ा कारण कांग्रेस द्वारा वोट कटवा की भूमिका निभाना माना गया।

दिल्ली में एक दशक तक सत्ता में रहने वाली आप को इस बार हार का सामना करना पड़ा, और 25 वर्षों के बाद राजधानी में बीजेपी ने बहुमत के साथ सरकार बनाई। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस और आप के बीच आपसी सहयोग की कमी ने विपक्ष को कमजोर किया और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिला।

इंडिया गठबंधन की बैठक में कांग्रेस सहित कई दल शामिल

3 जून को दिल्ली स्थित संविधान क्लब में इंडिया गठबंधन की बैठक आयोजित की गई। इसमें प्रमुख विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस से जयराम रमेश, शिवसेना (उद्धव गुट) से संजय राउत, समाजवादी पार्टी से राम गोपाल यादव, राष्ट्रीय जनता दल से मनोज झा और तृणमूल कांग्रेस से डेरेक ओ’ब्रायन शामिल हुए।

इन नेताओं ने बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की जिसमें बताया गया कि प्रधानमंत्री को भेजे गए पत्र पर 16 राजनीतिक दलों ने हस्ताक्षर किए हैं। पत्र में संसद का विशेष सत्र बुलाकर राष्ट्रीय सुरक्षा, विदेश नीति और सेना के ऑपरेशन जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की मांग की गई है।

कांग्रेस का बयान – ‘जनता के प्रति जवाबदेह है संसद

बैठक के बाद कांग्रेस नेता दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा कि जब देश पर हमला हुआ, तो कांग्रेस सहित सभी विपक्षी दलों ने एकजुट होकर सेना और सरकार को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका द्वारा सीजफायर की घोषणा के बाद यह जरूरी हो गया है कि देश की संसद में इस विषय पर विस्तार से चर्चा हो।

हुड्डा ने आगे कहा, “संसद लोकतंत्र का सर्वोच्च मंच है और सरकार को वहां आकर देश की जनता को जवाब देना चाहिए। सिर्फ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बयान देना काफी नहीं है।”

जहां एक ओर विपक्ष सरकार से पारदर्शिता की मांग करते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाने पर जोर दे रहा है, वहीं विपक्षी दलों के बीच मतभेद भी खुलकर सामने आ रहे हैं। आप का कांग्रेस से अलग होकर विशेष सत्र की मांग करना इंडिया गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े करता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि विपक्ष इस मुद्दे पर साझा रणनीति बना पाता है या नहीं, और क्या सरकार विपक्ष की मांगों को मानते हुए विशेष सत्र बुलाती है।

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