अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोर्ट का फैसला: तीनों दोषियों को उम्रकैद, परिवार को मिलेगा मुआवजा

उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुना दिया। कोर्ट ने इस मामले में मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों सौरभ भास्कर व अंकित गुप्ता को दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही तीनों पर जुर्माना भी लगाया गया है। अदालत ने पीड़ित परिवार को चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी आदेश दिया है।

पुलकित आर्य, जो कि घटना के समय तत्कालीन भाजपा नेता विनोद आर्य का बेटा था, को भारतीय दंड संहिता की धाराएं 302 (हत्या), 201 (सबूत मिटाना), 354 ए (छेड़छाड़) और अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम की धारा 3(1)d के तहत दोषी पाया गया। वहीं सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को हत्या, सबूत मिटाने और आईटीपीए एक्ट की संबंधित धाराओं में सजा सुनाई गई।

क्या था मामला और कैसे हुई जांच
अंकिता भंडारी पौड़ी जिले के यमकेश्वर की रहने वाली 19 वर्षीय युवती थी, जो वनतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के पद पर कार्यरत थी। 18 सितंबर 2022 को वह रहस्यमयी तरीके से लापता हो गई थी। पुलिस को 24 सितंबर को उसका शव ऋषिकेश के पास चीला नहर से मिला था।

जांच में सामने आया कि अंकिता और पुलकित के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। पुलकित आर्य ने अपने कर्मचारियों सौरभ और अंकित के साथ मिलकर उसे नहर में धक्का दे दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि पुलकित ने अंकिता पर एक वीआईपी मेहमान को “स्पेशल सर्विस” देने का दबाव बनाया था, लेकिन जब अंकिता ने मना कर दिया, तो उसकी हत्या कर दी गई।

इस जघन्य अपराध के सामने आने के बाद राज्यभर में आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया, जिसने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की। अभियोजन पक्ष ने 97 गवाहों की सूची दी, जिनमें से 47 प्रमुख गवाहों को अदालत में पेश किया गया।

सरकार ने दिया पीड़ित परिवार को साथ
इस पूरे मामले में सरकार ने पीड़ित परिवार को सहायता देने के कई कदम उठाए। पीड़ित परिवार की मांग पर केस में तीन बार वकील बदले गए ताकि बेहतर न्याय मिल सके। इसके अलावा सरकार ने परिवार को आर्थिक मदद, नौकरी और कानूनी सहायता भी प्रदान की।

इस फैसले से अंकिता के परिवार को कुछ हद तक न्याय मिला है, लेकिन उन्होंने साफ किया है कि यह केवल एक शुरुआत है और वे इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए लगातार आवाज उठाते रहेंगे।

अंकिता भंडारी हत्याकांड ने देश को झकझोर कर रख दिया था। दो साल आठ महीने की कानूनी लड़ाई के बाद अब जाकर दोषियों को उनके गुनाहों की सजा मिली है। यह फैसला न केवल अंकिता के लिए न्याय है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कानून के शिकंजे से कोई भी नहीं बच सकता, चाहे वह किसी प्रभावशाली परिवार से क्यों न हो।

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