बिहार में कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन की ओर से सीएम फेस के लिए तेजस्वी यादव का नाम नहीं लिया, सियासत हुयी तेज
बिहार की सियासत में हलचल मच गई है, क्योकि कांग्रेस ने इंडिया गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में तेजस्वी यादव का नाम घोषित नहीं किया। यह फैसला आरजेडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
कांग्रेस का कहना है कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का फैसला अभी गठबंधन के सभी दलों से विचार विमर्श करने के बाद लिया जायेगा। दूसरी ओर आरजेडी इस फैसले से नाराज नजर आ रही है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि तेजस्वी यादव ही एनडीए के नेता और मुख्यमंत्री नितीश कुमार को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं।
कांग्रेस की रणनीति क्या है?
राजनितिक विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए आरजेडी पर दबाव बनाना चाहती है। चूँकि कांग्रेस के बिना गठबंधन का सामाजिक समीकरण कमजोर हो सकता है, इसलिए पार्टी चाहती है कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर अंतिम फैसला पूरी सहमति से हो।
कांग्रेस यह भी चाहती है कि बिहार में उसके नेताओं को ज्यादा महत्त्व मिले, क्योंकि पिछले चुनावों में कांग्रेस के प्रदर्शन पर आरजेडी सवाल उठाती रही है। कुछ सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस को जेडीयू और नितीश कुमार के रुख का भी इंतज़ार है, क्योंकि नितीश कुमार फिर से विपक्षी खेमे में आते हैं तो समीकरण बदल सकते हैं।
आरजेडी की नाराजगी का गठबंधन पर असर
आरजेडी के नेता इस फैसले से असहज हैं। पार्टी समर्थकों का मानना है कि तेजस्वी यादव ही गठबंधन का सबसे मजबूत चेहरा हैं और कांग्रेस का यह कदम गठबंधन के अंदर अविश्वास बढा सकता है। अगर कांग्रेस तेजस्वी को समर्थन देने में देरी करती है या कोई और नाम आगे लाने की कोशिश करती है, तो आरजेडी और कांग्रेस के रिश्ते बिगड़ सकते हैं।
आरजेडी के कुछ नेताओं ने यह भी संकेत दिया है कि अगर कांग्रेस ने तेजस्वी को समर्थन नहीं दिया, तो बिहार में विपक्षी एकता कमजोर हो सकती है। जिसका फायदा सीधे तौर पर एनडीए और बीजेपी को मिलेगा।
