अतीक की बेगम शाइस्ता पर पुलिस ने कसा शिकंजा, मददगारों की सूची तैयार

उमेश हत्या कांड शामिल अतीक की बेगम शाइस्ता परवीन पर पुलिस और एसटीएफ ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शाइस्ता अभी भी पुलिस की पकड़ से दूर है। उसकी गैंग के जो लोग उसकी आर्थिक और संरक्षण में मदद कर रहे है उन पर भी पुलिस ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। पुलिस ने शाइस्ता के मददगारों की सूची भी तैयार कर ली है। एक रिपोर्ट के अनुसार शाइस्ता के तीन मददगारों का एनकाउंटर भी हो चुका है।

जहाँ शाइस्ता की मदद करने वाले सात वकीलों और उसे संरक्षण और आर्थिक मदद करने वाले 20 क़रीबिओं के नाम सूची बनाई गयी है। इस सभी पर पुलिस और एसटीएफ की पैनी नजर है। सूत्रों के अनुसार अतीक की गिरफ्तारी के बाद शाइस्ता ने ही अतीक के जमीनों के कारोबार को संभाला। उसने जमीनों के कारोबार को संचालित करने के लिए गैंग के लोगों से हत्याएं करायी। शाइस्ता पर मुक़दमे दर्ज हैं जिनमे से मुकदमे धोखाधड़ी के हैं मुक़दमा उमेश पल हत्याकांड का है।

शाइस्ता का पश्चिम बंगाल में होने शक

शाइस्ता के पश्चिम बंगाल में छिपने का शक है। शाइस्ता के छिपाने के ठिकाने कौशाम्बी, ग्रेटर नोएडा, मेरठ, दिल्ली, मुंबई और पश्चिम बंगाल हैं। सूत्रों की मानें तो शाइस्ता प्रयागराज के ही आस पास कहीं छिपी हुयी है। अतीक की मौत के बाद से वह किसी और मोबाइल का इस्तेमाल कर रही है जिससे उसका कोई सुराग नहीं लग पा रहा है। अब पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि शाइस्ता के करीबी फरार चल रहे शूटर गुड्डू मुस्लिम और साबिर ने कहीं शाइस्ता के संपर्क तो नहीं किया।

शाइस्ता ने राजनीती में भी आने की कोशिश

शाइस्ता ने सबसे पहले सपा से अपना राजनीती करियर शुरू करना चाहा। लेकिन अतीक से दूरियां बढ़ने के बाद उसने एआईएमआईएम के जरिये राजनीती में स्थापित होना चाहा। बाद में बसपा से प्रयागराज के मेयर का प्रत्याशी बनाया गया।

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